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प्रदूषण पर SC का केंद्र से सवाल, प्रदूषण तो तेज हवा से कम हुआ, आपने क्या किया

नई दिल्‍ली : प्रदूषण मामले (Air pollution) पर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने मंगलवार को केंद्र सरकार से तीखे सवाल पूछे. सुनवाई शुरू होते ही याचिकाकर्ता के वकील विकास सिंह ने कहा कि एक अखबार में खबर छपी कि पंजाब में चुनाव के कारण पराली जलाने पर कोई जुर्माना नहीं लगाया.

इस पर CJI एनवी रमना ने कहा कि हम इससे संबंधित नहीं हैं. विकास सिंह ने कहा कि हम प्रदूषण से चिंतित हैं तो जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि राज्यों को माइक्रो मैनेज नहीं कर सकते.इसके बाद CJI ने केंद्र से पूछा, ‘आप बताइए क्या किया गया? आपने बताया था कि 21 नवंबर से हालात ठीक होंगे. तेज हवा की वजह से हम बच गए हैं लेकिन मौसम विभाग की खबर थी कि आज शाम से फिर गंभीर हो सकते हैं.

‘सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि प्रदूषण कम हुआ है तो सीजेआई ने कहा- तेज हवा की वजह से, आपके कदमों कि वजह से नहीं. आप बताइए कि क्या कदम उठाए गए हैं? सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि 20 नवंबर को AQI 403 था, कल यह 290 था. आज ये 260 है. केंद्र सरकार की ओर से एक लिखित नोट जवाब दिया गया जिसे तुषार मेहता ने पढ़कर सुनाया.

इससे पहले,प्रदूषण को लेकर दिल्ली सरकार (Delhi government) ने सुप्रीम कोर्ट में  हलफनामा दाखिल किया, इसमें प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए  उठाए जाने वाले कदमों के बारे में  जानकारी दीगई है. हलफनामे में बताया गया है कि  सभी शैक्षणिक संस्थान अगले आदेश तक केवल ऑनलाइन मोड की अनुमति के साथ बंद किए गए हैं,

पूरे एनसीआर में कम से कम 50% सरकारी कर्मचारी घर से काम करेंगे, इसके साथ ही निजी प्रतिष्ठानों को 21 नवंबर तक ऐसा करने के लिए प्रोत्साहित किया गया. यह भी जानकारी दी गई है कि  गैर-जरूरी सामान ले जाने वाले ट्रकों को 26 नवंबर तक प्रवेश नहीं करने दिया जाएगा, दिल्ली/एनसीआर में डीजल जनरेटर पर प्रतिबंध लगाया गया है, साथ ही रेलवे, मेट्रो एयरपोर्ट या राष्ट्रीय सुरक्षा/रक्षा संबंधी कार्यों को छोड़कर निर्माण गतिविधियों पर रोक लगाई गई थी.

गौरतलब है कि प्रदूषण (Pollution) मामले को लेकर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट, केंद्र और दिल्‍ली सरकार  को फटकार लगा चुका है. 17 नवंबर को सुनवाई के दौरान सीजेआई ने कहा था कि ये कॉमन सेंस की बात है कि इन महीनों में पराली जलाने की घटना बढ़ जाती हैं, ऐसे में से सभी को पता है,

लेकिन कोई कदम नहीं उठाए जाते. इस पर सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा था हमने अपने हलफनामे में कहा था कि पराली जलाने जैसे कुछ कारक प्रदूषण में अक्टूबर के बाद अधिक योगदान करते हैं. यह पूरे साल नहीं है. हमने तब कहा था कि यह उन दो महीनों में बढ़ता है और यह लगभग 35-40% है, लेकिन यह अनुमान लगाया गया कि हमने कहा है कि पंजाब चुनाव के कारण योगदान केवल 4-7% है. CJI ने कहा कि ये आंकड़े हमारे लिए महत्वपूर्ण नहीं हैं. मुद्दे को घुमाने की कोशिश न हो. हमें प्रदूषण कम करने की चिंता है. तुषार ने कहा कि लेकिन कुछ ऐसे भी हैं, जो कॉमन सेंस का उपयोग नहीं कर रहे हैं.

 

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