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दिल्ली हाट में चल रहे जनजातीय इंडिया आदि महोत्सव में उत्तम जीआई-टैग उत्पाद विशेष केंद्र में

उत्तराखंड से उत्पादित 7 नए जीआई टैगों को जारी करने के साथ ही ट्राइफेड द्वारा प्रारंभ की गई जनजातीय जीआई उत्पादों की संख्या बढ़कर 66 हो चुकी है

19 नवंबर, 2021 से आयोजित जनजातीय इंडिया आदि महोत्सव में जीआई उत्पादों पर विशेष रूप से ध्यान केंद्रित किया गया है। प्रधानमंत्री के सलाहकार श्री भास्कर खुल्बे द्वारा आदि महोत्सव का दौरा किया गया और जनजातीय उत्पादों के बीच भौगोलिक संकेत को बढ़ावा देने के लिए ट्राईफेड के प्रयासों की सराहना की गई।

आदि महोत्सव के इस संस्करण में जीआई उत्पादों ने अपने आपको एक प्रमुख स्थान पर स्थापित कर लिया है और 50 से ज्यादा पहचाने गए ऐसे उत्पादों को जनजातीय लोगों के द्वारा पूरे पंडाल में स्टालों के माध्यम से प्रदर्शित किया गया है। कई दर्शकों द्वारा इन स्टॉलों पर बहुत ज्यादा दिलचस्पी के साथ अपनी उपस्थिति दर्ज कर रहे हैं।

इसके अतरिक्त, उत्तराखंड से 7 नए जीआई टैग किए गए उत्पादों का शुभारंभ किया गया। जिसमें एपन क्राफ्ट, टम्टा उत्पाद, रिंगल क्राफ्ट, थुलमा, भुटियादान कालीन, च्यौरा तेल और मुंशियारी राजमा शामिल हैं, जिनको ट्राइफेड द्वारा आदि महोत्सव में प्रचारित किए गए जनजातीय जीआई उत्पादों की संख्या को 66 तक लेकर जाते हुए जारी किया गया है।

श्री भास्कर खुल्बे द्वारा अधिकांश स्टालों पर जाकर वन धन प्राकृतिक और जैविक उत्पाद ,जनजातीय हस्तशिल्प और अन्य कलात्मक कृतियां आदि समृद्ध जनजातीय उत्पादों की सराहना की गई और जनजातीय उत्पादों के बीच भौगोलिक संकेत को बढ़ावा देने की कोशिश करने के साथ-साथ समृद्ध जनजातीय उत्पादों की भी सराहना की गई।

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इस अवसर पर श्री खुल्बे ने कहा कि“मुझे इस बात की बहुत खुशी महसूस हो रही है कि ट्राईफेड ने जीआई टैग उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए और उसे एक ब्रांड में तब्दील करने के लिए सक्रिय रूप से कदम उठाया है, जिसके माध्यम से जनजातीय कारीगरों को सशक्त बनाया जा सके। पूरे देश के सभी जनजातीय कारीगरों को एक ही स्थान पर लाने की दिशा में आदि महोत्सव एक बेहतरीन उपाय है। मैं सभी दिल्ली निवासियों से आग्रह करता हूं कि वे इस अनूठे उत्सव में शामिल हों।“

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जनजातीय इंडिया आदि महोत्सव में प्रदर्शित जीआई उत्पादों में राजस्थान ब्लू पॉटरी, कोटा का दरिया फैब्रिक, मध्य प्रदेश का चंदेरी और माहेश्वरी सिल्क, बाघ प्रिंट, ओडिशा का पट्टाचित्र, कर्नाटक का बिदरीवेयर, उत्तर प्रदेश का बनारसी सिल्क, पश्चिम बंगाल की दार्जिलिंग चाय,हिमाचल प्रदेश का काला जीरा, बहुत मसालेदार नागा मिर्च और उत्तर-पूर्व की बड़ी इलायची जैसी प्रसिद्ध और उत्तम वस्तुएं शामिल हैं।

जब से भौगोलिक संकेत टैगिंग ने ज्यादा महत्व प्राप्त कर लिया है तब से इसका ध्यान लोकल फॉर वोकल की ओर स्थानांतरित हुआ है और यह एक आत्मानिर्भर भारत का निर्माण कर रहा है। जनजातीय कार्य मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले ट्राइफेड ने जनजातीय उत्पादों के साथ-साथ जीआई टैग प्राप्त उत्पादों को बढ़ावा देने और उन्हें एक ब्रांड के रूप में परिवर्तित करने की सुविधा प्रदान की है, जो अपने आप में एक बहुत बड़ा उदाहरण है।

इन पहलों का उद्देश्य जनजातीय कारीगरों का सशक्तिकरण करते हुएसदियों पुरानी जनजातीय परंपराओं और तरीकों की पहचान करने और उन्हें बढ़ावा देने में सहायता प्रदान करना है जो शहरीकरण और औद्योगीकरण के कारण आज विलुप्त होने की अवस्था में हैं।

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भौगोलिक संकेत, जिसको विश्व व्यापार संगठन द्वारा मान्यता प्रदान की गई है, का उपयोग भौगोलिक क्षेत्र को लक्षित करने के लिए किया जाता है जहां से एक उत्पाद, चाहे वह कृषि उत्पाद हो, प्राकृतिक उत्पाद हो या निर्मित उत्पाद हो और उन गुणों या विशेषताओं के प्रति आश्वासन भी प्रदान करता है जो उस विशिष्ट भौगोलिक क्षेत्र के लिए अपने आप में अद्वितीय माने जाते हैं।

भारत इस सम्मेलन का हस्ताक्षरकर्ता बना, जब डब्ल्यूटीओ के सदस्य के रूप में उसने भौगोलिक संकेत (पंजीकरण एवं संरक्षण अधिनियम), 1999 को अधिनियमित किया, जिसे 15 सितंबर, 2003 से लागू किया गया।

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ट्राइफेड द्वारा आदि महोत्सव के माध्यम से किया गया प्रयास पूरे देश में जनजातीय समुदायों के समृद्ध एवं विविध शिल्पों, संस्कृतियों और व्यंजनों से आम लोगों को एक ही स्थान पर परिचय कराने के लिए है।

इन जीआई उत्पादों के अतरिक्त, कोई भी व्यक्ति जनजातीय हस्तशिल्पों और उत्पादों और जैविक वस्तुओं की भी प्राप्ति कर सकते हैं-प्राकृतिक और प्रतिरक्षा बढ़ाने वाले जनजातीय उत्पाद- जैसे वर्जिन नारियल तेल, जैविक हल्दी, सूखा आंवला, जंगली शहद, काली मिर्च, रागी, त्रिफला, मूंग दाल, उड़द दाल, सफेद सेम और दलिया जैसी मसूर के मिश्रण से लेकर कलाकृतियाँ जैसी चित्रकारी वाली शैली या पटचित्र;

डोकरा शैली में दस्तकारी के आभूषणों से लेकर पूर्वोत्तर की वांचो और कोन्यक जनजातियों के मोतियों के हार तक, अर्थात् समृद्ध और जीवंत वस्त्र और रेशम; रंगीन कठपुतलियों और बच्चों के खिलौनों से लेकर पारंपरिक बुनाई जैसे डोंगरिया शॉल और बोडो बुनाई तक; बस्तर के लौह शिल्प से लेकर बांस के शिल्प और बेंत के फर्नीचर तक। आदि महोत्सव में कोई भी व्यक्ति जनजातीय लोगों के कलात्मक रूपों का नमूना प्राप्त कर सकता है और उनके व्यंजनों का आनंद भी प्राप्त कर सकता है।

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आदि महोत्सव- जनजातीय शिल्प, संस्कृति और वाणिज्य की भावना के उत्सव का आयोजन दिल्ली हाट, आईएनए, नई दिल्ली में 30 नवंबर, 2021 तक सुबह 11 बजे से रात 9 बजे तक किया जा रहा है।

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