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रोजाना बादाम खाने से दिल की बीमारियों के इलाज पर खर्च कम आएगा

दिल के रोग के खतरे के लिए मार्कर के रूप में एलडीए कोलेस्ट्रोल  लेवल में बदलाव का उपयोग कर की गई नई मॉडलिंग रिसर्च से पता चलता है कि हर दिन 42.5 ग्राम बादाम खाने से फर्क पड़ सकता है

मोडेस्टो सीए । टफ्ट्स यूनिवर्सिटी की हाल में ही की गई रिसर्च से पता चलता है कि रोजाना 42.5 ग्राम बादाम खानेवाले अमेकिन उपभोक्ताओं में बादाम का सेवन नहीं करनेवालों की तुलना में दिल की बीमारियों के इलाज पर आनेवाले खर्च को कम करने में मदद मिल सकती है। स्टडी के लिए फंड आल्मंड बोर्ड ऑफ कैलिफोर्निया की ओर से मुहैया कराया गया था।

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार दिल की बीमारियां (कार्डियोवैस्कुलर डिजिज यानी सीवीडी) दुनिया भर और भारत में लोगों की मौत का नंबर वन कारण है। सीवीडी का इलाज काफी महंगा है। इसके इलाज पर होने वाले खर्च से मरीज और उसके परिवार पर भारी आर्थिक बोझ पड़ सकता है। भारत के लिए खासतौर से सीवीडी गंभीर चिंता का कारण बन गया है।

दिल के रोगों के तेजी से फैलने, काफी कम उम्र में लोगों को यह बीमारी होने और उच्च मृत्यु दर ने स्थिति को काफी चिंताजनक बना दिया है। भारत में जिन कारकों ने ह्रदय रोग के मामलों को बढ़ाने में अपना योगदान दिया है, उनमें दक्षिण एशियाई लोगों की आनुवांशिक बनावट और इसके कारण उनके रोग की चपेट में आने का खतरा, लगातार बदलती जीवनशैली, व्यायाम की कमी, असंतुलित भोजन और लोगों का भारी मात्रा में सैचुरेटेड और ट्रांसफैट का सेवन करना शामिल है।

इससे पहले भी की गई स्टडीज से पता चलता है कि रोजाना बादाम खाने से कम घनत्व के लिपोप्रोटीन (एलपीएल “बैड”) कोलेस्ट्रोल लेवल को कम करने में मदद मिल सकती है। यह भारतीयों के बीच दिल के रोग का जोखिम बढ़ाने का ऐसा कारक है, जिसे पहचान लिया गया है।

इस अध्ययन का उद्देश्य अमेरिकी आबादी में एलडीए कोलेस्ट्रोल लेवल में बदलाव के माध्यम से कोरोनेरी हार्ट डिजीज से बचाव में बादाम की खपत की लागत प्रभावशीलता का अनुमान लगाना था। इसके लिए लघु अवधि के केस विश्लेषण और 10 साल के लिए जोखिम से बचाव के तरीकों का इस्तेमाल किया गया। शोधकर्ताओं ने 42.5 ग्राम बादाम प्रतिदिन खाने वालों के मुकाबले बादाम न खाने वाले लोगों के संबंधों का आकलन करने के लिए मॉडल विकसित किया।

ह्रदय रोग  के पैमानों में एलडीएल लेवल में बढ़ोतरी की संभावना, मायोकार्डिया इनफेरक्शन (एमआई या हार्ट अटैक होने का खतरा), एमआई से संबंधित सर्जरी, ऑपरेशन के कारण हुई मरीजों की मौत और 2012 में अमेरिकी आबादी में इलाज के खर्च की लागत और प्रक्रियाओं को शामिल किया गया है। इस मॉडल में शोध में इस्तेमाल किए गए बादामों की कीमत को भी कारक बनाया गया है। यह 2012 में अमेरिकी बाजार की कीमत पर आधारित थे।

 

इस रिसर्च में इस्तेमाल किया गया बेस केस मॉडल टाइप 2 डायबिटीज के बढ़ते जोखिम के साथ 150 अमेरिकी वयस्कों पर की गई स्टडी है। इसमें दिखाया गया कि 42.5 ग्राम बादाम खाने वालों में बादाम न खाने वालों के मुकाबले इलाज पर सालाना खर्च में 363 डॉलर की बचत होती है। बादाम खाने वालों में दिल की बीमारियों का जोखिम के कारकों में काफी कमी आती है , जिसमें एलडीएल कोलेस्ट्रोल, कुल कोलेस्ट्रोल, शरीर के वजन और एपोलीप्रोटीन बी (जिसे एपो-बी के नाम से भी जाना जाता है, शामिल हैं। यह हानिकारक एलडीए में पाया जाना वाला मुख्य प्रोटीन है।) ये सुधारे गए पैमाने दिल की बीमारियों के लिए होने वाले खर्च की औसत लागत को कम करते है।

दिल्ली मैं मैक्स हेल्थकेयर विभाग में रीजनल हेड डायटेटिक्स रितिका समद्दर ने कहा,  “स्टडी, बादाम की खपत, दिल की सेहत और उससे होने वाले इलाज के खर्चों में कमी से होने वाले लाभ के बीच  एक सकारात्मक संबंध स्थापित करती है। इसमें से हर कारक भारत जैसे देश के लिए बहुत उपयोगी है, जहां दिल की बीमारियों के मामले बढ़ते जा रहे हैं।

हालांकि इससे पहले की गई बहुत सी स्टडीज में बादाम के सेहत पर होने वाले लाभ का विश्लेषण किया गया। नई रिसर्च में भी बादाम खाने से लंबी अवधि में इलाज के खर्च के रूप में कमी से लाभ को दर्शाया गया है, जो बेहद अनोखा है। इसलिए अपने परिवार और अपने भोजन में बादाम तो शामिल करना सुनिश्चित कर आप बिना किसी ज्यादा खर्च के स्वस्थ लाइफस्टाइल अपना सकते हैं।“

जब स्टडी में इस समय अवधि को 10 साल के लिए बढ़ा दिया गया था, तब भी नतीजों का पैटर्न समान ही था। बादाम न खाने वाले लोगों में दिल के रोगों से बचाव के खर्च के रूप में 2566 डॉलर की लागत आई। इसके अलावा बादाम खाने वाले लोगों को दिल की बीमारियों से बचाव के लिए केवल 1806 डॉलर खर्च करने पड़े या 760 डॉलर की बचत हुई।

न्यूट्रिशन और वेलनेस कंसलटेंट,शीला कृष्णस्वामी ने कहा, “ इस नए स्टडी के नतीजे काफी दिलचस्प हैं। आनुवांशिक बनावट, निष्क्रिय जीवनशैली, खराब आहार व्यवस्था और ज्यादा मात्रा में नमक के सेवन से भारतीयों को ह्रदय रोग होने का खतरा काफी रहता है। अगर परिवार में किसी सदस्य को बीमारी हो जाती है तो पूरे परिवार का मेडिकल खर्च  बढ़ जाता है।  इसलिए जिन व्यक्तियों के परिवार में ह्रदय रोगों और जोखिम के कारकों का जेनेटिक इतिहास रहा हो (हाईबीपी, डायबिटीज और मोटापा आदि), मैं उन्हें अन्य चीजों के साथ अपने भोजन में बदलाव कर उसमें मुट्ठी भर बादाम को शामिल करने का सुझाव देता हूं। अगर इसे दीर्घकालिक अवधि में देखा जाए तो अपनी जीवनशैली में सुधार से न केवल आपके दिल की सेहत पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा, बल्कि इससे कुल खर्चों में भी कटौती हो सकती है।“

इन विश्लेषणों के आधार पर शोधकर्ताओं ने निष्कर्ष निकाला कि 42.5 ग्राम बादाम रोज खाना लघु अवधि में दिल की बीमारियों से बचाव की प्रभावी रणनीति है। इससे 10 वर्ष तक संभावित रूप से बचाव हो सकता है।

फिजिकल और मेंटल फिटनेस की एक्सरसाइज कराने की विशेषज्ञ और डाइट और न्यूट्रिशन कंसलटेंट माधुरी रुइया ने अध्ययन के नतीजों पर  कहा, “इस स्टडी को भारत जैसे देश के संदर्भ में लंबे समय तक व्यावहारिकता की कसौटी पर देखना दिलचस्प होगा। भारत में दिल की बीमारियां मरीजों की मौत होने के प्रमुख कारणों में से है।

हेल्दी स्नैक्स के रूप में बादाम रोज खाना जैसे विकल्प एक छोटा, लेकिन प्रभावशाली कदम है, जिससे निश्चित रूप से लंबे समय में फायदा होता है। इसलिए अगली बार जब आप सुपरमार्केट जाएं तो सेहत को पूर्ण रूप से फायदा न पहुंचाने वाले स्नैक्स की जगह भुने, तले और कच्चे बादाम खरीदें। इस तरह आप स्वस्थ जीवन शैली के अपने सफर की शुरुआत कर सकेंगे।

अध्ययन एक  नजर में अमेरिकी आबादी में प्रतिदिन 42.5 ग्राम बादाम के मुकाबले बादाम का बिल्कुल सेवन न करने और दिल के रोगों के आधार पर डिसिजन मॉडल विकसित किया गया था। इस स्टडी के मॉडल के लिए कई पैमाने विकसित किए गए थे, जिसमें एलडीएल कोलेस्ट्रोल बढ़ने की संभावना, गंभीर रूप से दिल का दौरा पड़ने, दिल के दौरे के मरीजों का इलाज करने , बीमारी और सर्जरी के कारण दम तोड़ने वाले और अमेरिकी आबादी में बीमारी के इलाज की खर्च की लागत के साथ गुणवत्तापूर्ण जीवन गुजारने से संबंधित वर्ष शामिल थे।

इलाज पर खर्च करने की रजामंदी के विभिन्न स्तरों के लिए संवेदनशील विश्लेषण किए गए। इसमें संभावित संवेदनशील विश्लेषण भी शामिल था। इसके तहत 10 साल तक जोखिम से बचाव, बादाम प्रक्रियाओं की विभिन्न कीमत और दिल की बीमारी से जूझ रहे मरीजों और वे मरीज, जिन्हें दिल की बीमारी नहीं थी, का कई पैमानों पर संवेदनशील विश्लेषण किया गया। इस अध्ययन का लक्ष्य दिल की बीमारियों से प्राथमिक रूप से बचाव में बादाम की खपत की लागत प्रभावशीलता का परीक्षण करना था।

नतीजा : अध्ययन के लिए इस्तेमाल बेस केस मॉडल में बादाम खाने वालों में बादाम न खाने वालों की अपेक्षा 363 डॉलर की इलाज की कम लागत आई और हाई क्वॉलिटी की जिंदगी जीने में 0.02 वर्षों का लाभ मिला। दिल की सेहत की देखभाल करने के लिए सालाना 50 हजार रुपये खर्च करने पर रजामंद होने वाले व्यक्ति को बादाम न खाने वाले व्यक्ति की अपेक्षा 1421 डॉलर का वार्षिक शुद्ध मौद्रिक लाभ मिला। सभी तरह की संवेदनशीलता के विश्लेषण में दिल की बीमारियों की रोकथाम में रोज बादाम खाना बादाम न खाने की तुलना में ज्यादा लागत प्रभावी और किफायती था।

अध्ययन की सीमाएं : इस अध्ययन की कई सीमाएं थी, जिसमें सबसे बड़ी अड़चन इसके आंकड़ों का न होना था। एलडीए कोलेस्ट्रोल को दिल की बीमारियों का मुख्य मध्यस्थ माना गया। हालांकि कुल कोल्सेट्रोल और एचडीएल का अनुपात इसका अच्छा संकेत हो सकता है। हालांकि शोधकर्ता केवल अध्ययन करने वाले लेखकों से ही एलडीएल-सी के रेस्पांस  का आंकड़ा हासिल करने में समर्थ हो पाए थे।

इसके अलावा अमेरिका में चूंकि काफी बड़ी संख्या में हेल्थ इंश्योरेंस के तमाम विकल्प हैं। शोधकर्ता इनके औसत प्रीमियम का संक्षिप्त रूप, प्रीमियम के तौर पर काटी जाने वाली राशि और दिल की बीमारियों के इलाज की औसत लागत पेश करने में सक्षम नहीं हो पाए। इसके अलावा हर स्टडी में हर मरीज के इलाज का औसत खर्च शामिल किया गया। इसलिए नतीजों और निष्कर्ष उन लोगों के लिए लागू हो सकते हैं, जिन्होंने बीमा न कराया हो। इस अध्ययन के अन्य नतीजों में यह तथ्य भी शामिल हैं कि इस स्टडी का फोकस अमेरिकी आबादी पर था, जिसमें टाइप टू डायबिटीज का काफी खतरा था।

इस अध्ययन में अमेरिका में हुई अन्य स्टडीज से मेडिकल ट्रीटमेंट की लागत और अन्य बीमारियां पनपने की संभावना पर भी विचार-विमंर्श किया गया।  इसलिए अध्ययन के नतीजे सभी देशों पर सामान्य रूप से लागू नहीं किए जा सकते। नतीजों की व्याख्या के लिए सावधानी की जरूरत है। लिटरेटर के डिजाइन में डाटा इनपुट ने रोडा अटकाया।

इसमें विशेष तौर पर संभावनाएं शामिल थीं। क्योंकि इस अध्ययन के नतीजे प्रारंभिक शोध पर आधारित न होकर प्रकाशित किए गए शोध पत्र पर बेस्ड थे। समय के साथ बादाम की कीमत और अन्य प्रक्रियाएं तय करने के लिए और अधिक आंकड़ों की जरूरत पड़ सकती है।

निष्कर्ष प्रतिदिन 42.5 ग्राम बादाम खोज खाना लघु अवधि के लिए दिल की बीमारियों से बचाव का एक लागत प्रभावी और किफायती तरीका है। लंबी अवधि में इसका संभावित रूप से बचाव होता है।