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इंदिरा गांधी की उनके प्रभावशाली नेतृत्व की मिसाल दी जाती थी : राहुल

नई दिल्ली : कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने अपनी दादी और पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को उनके 103वें जन्मदिन पर याद करते हुए श्रद्धांजलि दी है. उनका जन्म 19 नवंबर 1917 को हुआ था. राहुल गांधी ने अपने ट्विटर अकाउंट पर लिखा है एक कार्यकुशल प्रधानमंत्री और शक्ति स्वरूप श्रीमती इंदिरा गांधी जी की जयंती पर श्रद्धांजलि. Congress leader Rahul Gandhi pays tribute to former Prime Minister and his grandmother #IndiraGandhi at Shakti Sthal, on her birth anniversary New Delhi पूरा देश उनके प्रभावशाली नेतृत्व की आज भी मिसाल देता है लेकिन मैं उन्हें हमेशा अपनी प्यारी दादी के रूप में याद करता हूं. उनकी सिखायी हुई बातें मुझे निरंतर प्रेरित करती हैं.

वहीं कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने उन्हें याद करते हुए कहा है कि विश्व भर में लौह महिला कहलाई जाने वाली, दृढ निश्चय, साहस व अद्भुत क्षमता वाली, भारत की प्रथम व एक मात्र महिला प्रधानमंत्री, श्रीमती इंदिरा गांधी जी की जयंती पर उन्हें शत शत नमन. अपनी प्रतिभा व राजनीतिक दृढ़ता के लिए विश्वराजनीति के इतिहास में इंदिरा जी का नाम सदैव याद रखा जाएगा.

इंदिरा गांधी भारत की प्रथम महिला प्रधानमंत्री थीं. इंदिरा गांधी ने 1966 से 1977 के बीच लगातार तीन बार देश की बागडोर संभाली और उसके बाद 1980 में दोबारा इस पद पर पहुंचीं और 31 अक्टूबर 1984 को पद पर रहते हुए ही उनकी हत्या कर दी गई थी.

स्वतंत्र भारत के इतिहास में बहुत कम ही लोग ऐसे हुए हैं, जिन्होंने पूरी दुनिया की राजनीति पर अमिट छाप छोड़ी है. इंदिरा प्रियदर्शिनी गांधी भी एक ऐसा ही नाम है, जिन्हें उनके निर्भीक फैसलों और दृढ़निश्चय के चलते ‘लौह महिला’ कहा जाता है. जवाहरलाल नेहरू और कमला नेहरू के यहां 19 नवंबर,1917 को जन्मी कन्या को उसके दादा मोतीलाल नेहरू ने इंदिरा नाम दिया और पिता ने उसके सलोने रूप के कारण उसमें प्रियदर्शिनी भी जोड़ दिया.

वह प्रभावी व्यक्तित्व वाली मृदुभाषी महिला थीं और अपने कड़े से कड़े फैसलों को पूरी निर्भयता से लागू करने का हुनर जानती थीं. फौलादी हौसले वाली इंदिरा गांधी के कुछ फैसलों को लेकर वह विवादों में भी रहीं. जून 1984 में अमृतसर के स्वर्ण मंदिर में सैन्य कार्रवाई भी उनका एक ऐसा ही कदम था, जिसकी कीमत उन्हें अपने सिख अंगरक्षकों के हाथों जान गंवाकर चुकानी पड़ी. उन्होंने 1984 में अमृतसर में सिखों के पवित्र स्थल स्वर्ण मंदिर से आतंकवादियों को बाहर निकालने के लिए सैन्य कार्रवाई को अंजाम दिया था.

इसके अलावा 1975 में आपातकाल की घोषणा और उसके बाद के घटनाक्रम को भी उनके एक कठोर फैसले के तौर पर देखा जाता है. स्वतंत्र भारत के इतिहास में यह सबसे विवादस्पद काल था. आपातकाल में चुनाव स्थगित हो गए थे. इसे आजाद भारत का सबसे विवादास्पद दौर भी माना जाता है. वहीं अगली सुबह यानी 26 जून को समूचे देश ने रेडियो पर इंदिरा गांधी की आवाज में आपातकाल की घोषणा के बारे में सुना था.

इंदिरा गांधी अपने राजनीति जीवन के शुरुआती सफर के दौरान सार्वजनिक मंचों से बोलने में हिचकिचाती थीं. इंदिरा गांधी के डॉक्टर रहे डॉक्टर माथुर ने एक इंटरव्यू के दौरान बताया था कि 1969 में जब उनको बजट पेश करना था तो वो इतना डर गई थीं कि उनकी आवाज ही नहीं निकल रही थी.

इंदिरा गांधी और फिरोज गांधी का विवाह 1942 में हुआ था. इंदिरा फिरोज को इलाहाबाद से ही जानती थीं. ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में पढ़ाई करते समय इंदिरा गांधी की मुलाकात फिरोज गांधी से होती रहती थी. फिरोज उस समय लंदन स्कूल ऑफ इकॉनॉमिक्स में पढ़ाई कर रहे थे.

इंदिरा गांधी सक्रिय राजनीति में अपने पिता जवाहरलाल नेहरू के निधन के बाद आईं. उन्होंने प्रथम बार प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के कार्यकाल में सूचना और प्रसारण मंत्री का पद संभाला.  शास्त्री के निधन के बाद  वह देश की तीसरी प्रधानमंत्री चुनी गईं. इंदिरा गांधी को वर्ष 1971 में भारत रत्न से भी सम्मानित किया गया था.

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