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लक्ष्मी विलास बैंक का विलय DBS इंडिया में होगा

निजी क्षेत्र के 94 साल पुराना लक्ष्मी विलास बैंक का अब सिंगापुर के डीबीएस इंडिया के साथ विलय होना तय हो गया है. सरकार ने बुधवार को केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में बैंक के इस विलय योजना को मंजूरी दे दी है. इस विलय के साथ ही डिपॉजिटर्स पर अपने खातों से पैसों की निकासी पर आरबीआई की ओर से लगाया गया प्रतिबंध भी हटा दिया जाएगा. केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावडेकर ने केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक के बाद इस बाबत जानकारी दी है.

देश के बैंकिंग क्षेत्र के इतिहास में पहली बार ऐसा होने जा रहा है कि संकटग्रस्त किसी भारतीय बैंक को डूबने से बचाने के लिए किसी विदेशी बैंक में विलय किया जा रहा है. लक्ष्मी विलास बैंक इस साल का दूसरा बैंक है, जिसे आरबीआई ने डूबने से बचाया है. इससे पहले मार्च में आरबीआई ने येस बैंक को डूबने से बचाया था. वहीं, पिछले 15 महीनों में देखा जाए, तो लक्ष्मी विलास बैंक तीसरा बैंक है, जिसे डूबने से बचाया गया है.

सिंगापुर के डीबीएस इंडिया के साथ हुए सौदे के अनुसार, इस विलय योजना को पूरा होने के बाद डीबीएस इंडिया को 563 शाखा समेत 974 एटीम और रिटेल कारोबार में 1.6 अरब डॉलर की फ्रेंचाइजी मिलेगी. इसके साथ ही, 94 साल पुराने लक्ष्मी विलास बैंक का नाम खत्म हो जाएगा और साथ ही इसकी इक्विटी भी पूरी तरह खत्म हो जाएगी. अब इस बैंक का पूरा डिपॉजिट डीबीएस इंडिया के पास चला जाएगा.

आरबीआई की ओर से लक्ष्मी विलास बैंक में नियुक्त प्रशासक टीएन मनोहरन ने बीते 18 नवंबर को ही इस बात की जानकारी दे दी थी कि लक्ष्मी विलास बैंक का सिंगापुरी बैंक डीबीएस में विलय हो जाएगा. हालांकि, उन्होंने बैंक के करीब 20 लाख ग्राहकों को यह भरोसा भी दिया था कि उन्हें घबराने की कोई जरूरत नहीं है. बैंक में जमा उनका पैसा पूरी तरह सुरक्षित है. इसके साथ ही, उन्होंने यह भरोसा भी जताया कि लक्ष्मी विलास बैंक का सिंगापुर के डीबीएस के साथ निर्धारित समय सीमा में ही विलय हो जाएगा.

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