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रेलवे द्वारा यात्रियों से अतिरिक्त किराया वसूले जाने की खबरें भ्रामक और तथ्यों पर आधारित नहीं

પ્રતિકાત્મક

नीति के मुताबिक, विशेष किराये के मामले में भी सेकेंड सीटिंग के यात्रियों से अतिरिक्त 15 रुपए से ज्यादा का किराया नहीं लिया जाता है

मीडिया के एक हिस्से में ये खबर चल रही है कि रेलवे यात्रियों से अतिरिक्त किराया वसूल रहा है। ये एक भ्रामक खबरें हैं जो पूरी तरह से तथ्यों पर आधारित नहीं है।

यात्रियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए काफी समय से फेस्टिवल और हॉलिडे स्पेशल ट्रेनें चलाई जाती रही हैं। एक के बाद एक त्यौहार आ रहे हैं और आज भी मकर सक्रांति का त्यौहार मनाया जा रहा है। इस वर्ष विभिन्न क्षेत्रों से भारी मांग को देखते हुए ये फेस्टिवल ट्रेन चलाई गईं जिन्हें अभी तक जारी रखा गया है। साल 2015 से इस तरह की ट्रेनों में किराया सामान्य से थोड़ा अधिक होता है। इस साल कुछ भी नया नहीं किया गया है, ऐसा पहले से होता आया है।

यह ध्यान रखने की बात है कि रेलवे द्वारा हमेशा यात्री परिचालन को सस्ता बनाये रखा गया है। रेल यात्रा परिचालन में होने वाले घाटे को रेलवे उठाता है। कोविड-19 महामारी के इस मुश्किल वक्त में भी रेलवे ने ट्रेनों का आवागमन जारी रखा है। ट्रेनों के कई डिब्बों के कम भरे होने के बावजूद जन कल्याण के मकसद से इन्हें जारी रखा गया है। यही नहीं, रेलवे ने उन लोगों का खास ख्याल रखा है जो न्यूनतम किराए पर सफर करते हैं ताकि इस मुश्किल वक्त में ऐसे लोगों पर कम से कम भार पड़े।

वर्तमान में चल रही अन्य श्रेणियों की ट्रेनों को छोड़कर, बाकी सभी ट्रेनों में ज्यादा संख्या में सेकेंड सीटिंग श्रेणी के डिब्बों को जोड़ा गया है। सेकेंड सीटिंग में आरक्षित श्रेणी में कम किराए पर यात्रा की सुविधा दी जाती है।

कोविड-19 महामारी के इस दौर में 40 फीसदी यात्रियों ने सेकेंड सीटिंग में यात्रा की है जिसमें कोविड से पहले की अनारक्षित यात्राओं के मुकाबले बेहतर सुविधाएं दी जा रही हैं। नीति के मुताबिक, विशेष किराये के मामले में भी सेकेंड सीटिंग के यात्रियों से अतिरिक्त 15 रुपए से ज्यादा का किराया नहीं लिया जाता है।

भारतीय रेलवे लगातार ट्रेनों की संख्या में वृद्धि कर रहा है। विभिन्न परिस्थितियों और निर्धारकों को ध्यान में रखते हुए इस बात पर मंथन कर रहा है कि कोविड से पहले के वक्त में जितनी पैसेंजर ट्रेनें चलती थीं, उसी संख्या को पूर्ण रूप से पटरी पर लाया जाए।

इस महामारी से निपटने के लिए एक प्रयास के रूप में भारतीय रेल को 22 मार्च 2020 को देशभर में लगे लॉकडाउन के कारण सभी निरंतर चलने वाली ट्रेनों को रोकना पड़ा था। अब दोबारा ट्रेनों की आवाजाही को धीरे-धीरे शुरू किया जा रहा है।

कोविड-19 के इस चुनौतीपूर्ण वक्त में भी भारतीय रेलवे ने अपनी करीब 60 फीसदी मेल/एक्सप्रेस ट्रेनों को जारी रखा। इनमें से 77 फीसदी स्पेशल ट्रेनों का किराया सामान्य ट्रेनों जितना ही रखा है। प्रतिदिन लगभग 250 ट्रेनें विशेष किराए वाली ट्रेनों के तौर पर चलाई जा रही हैं। वर्तमान में रोजाना औसतन 1058 मेल या एक्सप्रेस, 4807 उपनगरीय सेवाएं और 188 पैसेंजर ट्रेनें चल रही हैं।

रेल आवागमन को सामान्य रूप में लाने से पहले राज्यों के स्वास्थ्य हालात और राज्य सरकारों के विचारों को ध्यान में रखना जरूरी है। लोगों के फायदे के लिए कई ट्रेनों को बेहद कम भरा होने के बावजूद भी चलाया जा रहा है।

स्पेशल ट्रेनों की संख्या को भी लगातार धीरे-धीरे बढ़ाया गया है। देश में परिस्थितियों पर लगातार नजर रखी जा रही है।

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