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दुनिया की जनसंख्या वर्ष 1800 में 1 अरब थी जो बढ़कर आज 7.8 अरब हो गई है

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“भारत के लिए जनसंख्या अनुमान से संकेत मिलता है कि कुल प्रजनन दर 2.37 (2011-2015) से घटकर 1.73 (2031-35) होने का अनुमान है”

केन्द्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. हर्ष वर्धन ने आज वायोन और ज़ी मीडिया की ‘पॉपुलेशन वर्सेस प्लानेट’ कॉन्फ्रेंस में भाग लिया और अपने विचार व्यक्त किए, जो उसके एक साल चलने वाले अभियान ‘मिशन सस्टेनेबिलिटी : पॉपुलेशन वर्सेस प्लानेट’ का एक हिस्सा है।

इस ई-कॉनक्लेव के साथ शुरू हुए इस अभियान में तमाम नीति विशेषज्ञों, जनसांख्यिकी शोधकर्ताओं और शिक्षाविदों द्वारा जनसंख्या स्थिरीकरण, शिक्षा के माध्यम से महिलाओं व युवाओं के सशक्तिकरण सहित कई मुद्दों पर विचार विमर्श किया जाएगा, क्योंकि दुनिया की जनसंख्या वर्ष 1800 में 1 अरब थी जो बढ़कर आज 7.8 अरब हो गई है।

कार्यक्रम के आयोजन के समय पर संतोष जाहिर करते हुए डॉ. हर्ष वर्धन ने कहा, “ज्यादा लोगों के लिए ज्यादा संसाधनों की जरूरत होती है और जैसे-जैसे जनसंख्या बढ़ती है, पृथ्वी के संसाधन घटते जाते हैं। जनसंख्या विस्फोट से पृथ्वी और मानव जाति कई तरह से प्रभावित हो रही है। भारत जैसे विकासशील देशों के लोगों को पर्यावरण संबंधी समस्याओं का ज्यादा प्रभाव पड़ता है।”

इसके बाद उन्होंने भारत द्वारा परिवार नियोजन अपनाने के लिए प्रोत्साहन देने की दिशा में किए गए प्रयासों पर बात की : 1952 में राष्ट्रीय परिवार नियोजन कार्यक्रम शुरू करने के साथ भारत ऐसा करने वाले दुनिया के शुरुआती देशों में से एक था, जिसमें बाद में मातृ और बच्चों के स्वास्थ्य के साथ ही किशोर स्वास्थ्य और पोषण को शामिल करते हुए इसका विस्तार कर दिया गया।

इसके साथ ही परिवार नियोजन के उपायों को अपनाने के प्रति जागरूकता के प्रसार और विस्तार के लिए व्यापक कदम उठाए गए, जिससे नागरिकों के लिए स्वस्थ जीवन सुनिश्चित किया गया;भले ही भारत की जनसंख्या 1951 की 36 करोड़ से बढ़कर 2011 में 121.02 करोड़ हो गई, लेकिन देश में प्रजनन क्षमता और मृत्यु दर दोनों में खासी गिरावट देखने को मिली; प्रति 1000 जनसंख्या पर 1951 में जन्म दर जहां 40.8 थी जो 2018 में घटकर 20 रह गई है;वहीं कुल प्रजनन दर (टीएफआर) वर्ष 1951 में जहां 6.0 थी, जो 2015-16 में घटकर 2.2 रह गई;भारत में मृत्यु दर 2012 की 7 से घटकर 2018 में 6.2 रह गई है।

इस संबंध में दूसरे विकासशील देशों के साथ भारत के समन्वय पर बोलते हुए उन्होंने कहा, “भारत परिवार नियोजन 2020 भागीदारी का एक महत्वपूर्ण और सक्रिय सदस्य रहा है, महिलाओं को गर्भ निरोधकों से जुड़ी जानकारी, सेवाएं और आपूर्तियों तक पहुंच में आने वाली नीतिगत, वित्तीय, डिलिवरी और सामाजिक-सांस्कृतिक बाधाओं को दूर करने के लिए भागीदारी पूर्ण प्रयास करता रहा है।

यह गठबंधन अब अगले चरण में प्रवेश कर रहा है, जिसने अभी तक परिवार नियोजन के विकल्पों तक पहुंच में सुधार के माध्यम से महिलाओं और बच्चों को संरक्षण के हमारे राष्ट्रीय एजेंडे को बढ़ावा दिया है।2012 में इस भागीदारी की शुरुआत के बाद से अब तक, भारत में आधुनिक गर्भ निरोधकों का 1.5 करोड़ ज्यादा अतिरिक्त लोगों ने इस्तेमाल किया है, जिससे देश में आधुनिक गर्भ निरोधकों का इस्तेमाल 55 प्रतिशत बढ़ गया है।”

उन्होंने बताया कि इस भागीदारी से भारत को राष्ट्रीय गर्भ निरोधक बास्केट में दो नए गर्भ निरोधक शामिल करने में मदद मिली है, जिनके नाम इंजेक्टेबल मेड्रॉक्सी प्रोजेस्टेरोन एसीटेट (एमपीए) और सेंटक्रोमैन हैं। वहीं इस अवधि के दौरान परिवार नियोजन के लिए कुल 3 अरब डॉलर का आवंटन किया गया था। भारत ने भागीदारी के अंतर्गत न सिर्फ अपने निर्धारित लक्ष्य हासिल किए हैं, बल्कि उनसे आगे भी निकल गया है।

2016 में लॉन्च हुए महत्वाकांक्षी और समग्र मिशन परिवार विकास की उपलब्धियों पर डॉ. हर्ष वर्धन ने कहा, “गर्भ निरोधकों की अंतिम छोर तक उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए डिजिटल इंडिया के अंतर्गत परिवार नियोजन लॉजिस्टिक्स प्रबंधन और सूचना प्रणाली विकसित की गई है।

सूचना शिक्षा एवं संचार के साथ ही व्यवहारगत बदलाव संवाद के सभी पहलुओं इस समग्र मीडिया अभियान में शामिल किया गया है और इस तरह से मांग हासिल की गई थी। गर्भावस्था के बाद गर्भनिरोधकों को मजबूती देकर पोस्ट- पार्टम इंट्रा-यूटेराइन कॉन्ट्रासेप्टिव डिवाइस (पीपीआईयूसीडी) के माध्यम से 1 करोड़ से ज्यादा महिलाओं को फायदा पहुंचाया गया है और गुणवत्ता में सुधार कार्यक्रम के केंद्र में बना हुआ है।

आपूर्ति, सेवा और सूचना के तीन प्रमुख मोर्चों पर लगातार प्रयास के परिणाम स्वरूप, भारत 14.2 करोड़ लाभार्थियों को आधुनिक गर्भ निरोधक उपलब्ध कराने में सक्षम रहा है और इस प्रकार 2019 में 5.6 करोड़ गैर नियोजित गर्भावस्था, 18.6 लाख असुरक्षित गर्भपात और 30,000 मातृ मृत्यु के मामलों से बचा जा सका।”

उन्होंने हाल में हुए राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण 5 के निष्कर्ष भी साझा किए, जिसमें परिवार नियोजन में भारत की उल्लेखनीय उपलब्धियां शामिल थीं- सर्वेक्षण में शामिल 22 राज्यों में से 20 में आधुनिक गर्भ निरोधक उपायों के इस्तेमाल में बढ़ोतरी दर्ज की गई और 21 में गर्भनिरोधकों के लिए अपूर्ण जरूरतों में कमी देखने को मिली, वहीं 19 में प्रजनन में गिरावट दर्ज की गई। 36 राज्यों और संघ शासित क्षेत्रों में 28 में कुल प्रजनन दर का रिप्लेसमेंट हासिल करने के कगार पर पहुंचने के साथ भारत ने कुल 2.1 प्रजनन दर हासिल कर ली है।

भारत के भविष्य पर इन आंकड़ों के प्रभाव को देखते हुए डॉ. हर्ष वर्धन ने कहा, “भारत और राज्य 2011-2036 के लिए जुलाई, 2020 में जारी जनसंख्या अनुमान से संकेत मिलते हैं कि कुल प्रजनन दर 2011-2015 की 2.37 प्रतिशत से घटकर 2031-35 के दौरान 1.73 हो जाने का अनुमान है।

युवाओं की बड़ी हिस्सेदारी के साथ भारत अब जनसांख्यिकीय बदलाव के दौर में है। 15-24 वर्ष के आयु वर्ग के युवाओं की आबादी 2011 के 23.3 करोड़ से घटकर 2036 में 22.7 करोड़ होने की संभावना है। हालांकि, जनसंख्या में कामकाजी वर्ग का अनुपात 2011 के 61 प्रतिशत से बढ़कर 2036 में 65 प्रतिशत होने का अनुमान है। भारत में हर साल कामकाजी वर्ग समूह में 1.2 करोड़ लोग जुड़ रहे हैं।”

केन्द्रीय मंत्री ने बताया कि किस तरह प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के अनुकरणीय नेतृत्व से इस बदलाव को लागू करने, भारत के युवाओं की क्षमताओं को बढ़ाना, राष्ट्र की प्रगति में योगदान के साथ उनकी आकांक्षाओं को पूरा करना आसान हो गया है: “हमारी सरकार ऐसे समृद्ध नए भारत के निर्माण के लिए प्रतिबद्ध है, जहां कोई भी पीछे न छूट जाए।

आत्मनिर्भर भारत का हमारा सपना युवाओं के कंधों को मजबूत बनाकर ही संभव होगा। राष्ट्रीय शिक्षा नीति, विज्ञान प्रौद्योगिकी एवं नवाचार नीति जैसे नीतिगत कदमों के साथ-साथ स्टार्ट अप इंडिया, फिट इंडिया और कई अन्य कार्यक्रम हमारे युवाओं के समग्र विकास को सुनिश्चित करने के हमारे संकल्प के प्रमाण हैं, जिससे आखिरकार भारत विश्व गुरु के रूप में सामने आएगा।”

डॉ. हर्ष वर्धन ने महिलाओं के स्वास्थ्य के लिए सरकार की प्रतिबद्धता पर भी बात की। उन्होंने कहा, “देश में 9 लाख से ज्यादा आशा कार्यकर्ता स्वास्थ्य को प्रोत्साहन दे रहे हैं और सशक्त ग्रामीण महिलाओं का प्रतिनिधित्व करते हैं। सरकार अब हमारे माननीय प्रधानमंत्री के महत्वाकांक्षी आकांक्षी जिले कार्यक्रम के माध्यम से समावेशी विकास सुनिश्चित कर रही है, जहां स्वास्थ्य, पोषण और शिक्षा महत्वपूर्ण स्तंभों का निर्माण करते हैं। भारत ने पूर्व में किशोरी विवाह को 47 प्रतिशत से घटाकर 26.8 प्रतिशत पर लाकर और किशोरी प्रजनन को 16 प्रतिशत से 7 प्रतिशत पर लागकर उल्लेखनीय प्रगति की है। भारत ने महिलाओं की शिक्षा और महिला कार्यबल की भागीदारी भी बढ़ाई है।”

राजनीतिक इच्छा शक्ति और बेहतर शासन, वित्तपोषण के प्रावधान, बेहतर योजना, कार्यान्वयन और प्रभावी निगरानी व सीख के द्वारा मिली सफलता के रूप में इसका उल्लेख करते हुए स्वास्थ्य मंत्री ने कहा, “यह इस बात का प्रमाण है कि उठाए गए कदमों का फायदा अब मिल रहा है। आज, भारत रिप्लेसमेंट स्तर के प्रजनन की स्तर पर पहुंच रहा है और मातृत और नवजात मृत्यु दर में अच्छा सुधार दर्ज किया है। प्रतिबद्धता और दृढ़ता के साथ, भारत देश के जनसंख्या स्थिरीकरण के लक्ष्य को हासिल करने और विकास के लक्ष्यों की ओर कदम बढ़ा सकता है।”


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